Abhinandan Varthaman

Abhinandan Varthaman was Returning to India

When the brave son of soil wing commander Abhinandan Varthaman was returning to India. At that time whatever was going in our country and what was he feeling, I tried to pen down those moments in the form of this poem. What did an Abhinandan Varthaman feel whenever something like that happened? In those moments of difficulties, we should help and support them instead of being a reason for the trouble and salute to wing commander Abhinandan Varthaman for his bravery and intelligence.

Abhinandan Varthaman

एक युद्ध का मदान, वहाँ भी था
एक युद्ध का मदान, यहाँ भी था
वहा के युद्ध से तो में, फिर भी जीत जाऊ
पर यहा के युद्ध पर, कैसे जीत पाऊ
वहा 100 से युद्ध करू
या यहाँ हज़ारों से
वहाँ जान गँवाऊँ
या यहाँ जान बचाऊँ
फिर चाहे हो इस पार या उस पार
लड़ना तो मुझे ही हैं- लड़ना तो मुझे ही हैं
एक युद्ध का मदान, वहाँ भी था
एक युद्ध का मदान, यहाँ भी था
वहाँ में पकड़ा गया
यहाँ में घेरा गया
सवाल वहाँ भी थे
सवाल यहाँ भी थे
पर सवालों से ना डरा में, ना डरा में
एक युद्ध का मदान, वहाँ भी था
एक युद्ध का मदान, यहाँ भी था
वहाँ कहानियाँ बनती गयी
और यहाँ सुर्ख़ियाँ
वहाँ भी में,यहाँ भी में
भूल गये सब, क्यूँ शुरू हुआ था यह
एक युद्ध का मदान, वहाँ भी था
एक युद्ध का मदान, यहाँ भी था
वहाँ के युद्ध से तो में, फिर भी जीत जाऊँ
पर यहाँ के युद्ध पर, कैसे जीत पाऊँ – कैसे जीत पाऊँ

For those who want to go back in their childhood. Please click here

https://en.wikipedia.org/wiki/Abhinandan_Varthaman