LockDown: Agar Kadam Tumhare Ruk Gaye Hote

The words were ringing in my head then I sat and pen down this …..This poem is dedicated to the condition when the lockdown announced in India but many people gathered at the Anand Vihar ISBT bus stand. They were more concerned about going home than worrying about their life. They have no idea that how many people can be infected with the terrible disease like Coronavirus..#stayhome#stayhealthy

अगर कदम तुम्हारे, रुक गये होते
तो कुछ कड़े फैसले, टल गए होते
फ़िक्र नहीं शायद, तुम्हें अपनी जान की
पर फ़िक्र करो, माँ-बाप की
कैसे वो तुमको बचा पाएंगे
जब इलाज ही, इसका वो नहीं ला पाएंगे
देखो अपनी दुनिया से बाहर, बाहर भी एक दुनिया है
जहाँ रोज़ न जाने कितनी, जिंदगियां खत्म हो रही हैं
मरने के बाद जिनको, कब्र भी नहीं नसीब हो रही हैं
ऐसी मौत चाहिए या सावधानी
एक बार, तुम भी करना इस पर विचार
अगर कदम तुम्हारे, रुक गये होते
तो कुछ कड़े फैसले, टल गए होते
जंग नहीं यह आसान हैं
मिलकर ही इस से लड़ पाएंगे
जब जा कर, कुछ जाने हम बचा पाएंगे
खुद को तस्वीरों में कैद करने से अच्छा हैं
खुद को तुम, घरों में कैद करो
यह कैद ही, तुमको बचा पायेगी
कुछ दूरियां ही, फिर से करीब लाएगी
जिंदगी रही, तभी फिर से मुलाकात हो पायेगी
रोक लो कदमो को, ठहर जाओ, जहाँ हो वही
यही संजीवनी हैं, जो तुम्हारे प्राणों की रक्षा कर पायेगी
अगर कदम तुम्हारे, रुक गये होते
तो कुछ कड़े फैसले, टल गए होते