Poem: COVID-19 Situation

आज वो घर नहीं रुकना चाहते
जो घर जाने के, बहाने बनाया करते थे
आज वो भी साथ खड़े हो रहे हैं
जो कल, दूरियाँ बनाया करते थे
आज वो भी वापस जाना चाहते हैं
जो महीने या सालों से नहीं गए थे
आज वो भी काम करना चाहते हैं
जो काम से, जी-चुराया करते थे
आज वो भी समय नहीं बिताना चाहते
जो समय नहीं हैं, बोल दिया करते थे
आज वो भी छुट्टिया नहीं चाहते हैं
जो छुट्टियो की, माँग करते थे
आज वो भी अपना ध्यान नहीं रख रहे हैं
जो कल रखा करते थे
आज वो भी, इस भयानक बीमारी से नहीं डर रहे हैं
जो कल ज़रा सी बीमारी से डर जाते थे
आज वो घर नहीं रुकना चाहते
जो घर जाने के, बहाने बनाया करते थे